महिलाओं के खिलाफ तीन प्रकार की हिंसा का किया उल्लेख; शिक्षा, वित्तीय स्वतंत्रता और निर्णय लेने के अधिकारों पर दिया जोर पुणे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुणे के एआईएसएसएमएस (AISSMS) कॉलेज मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से सीधा संवाद किया। लगभग सवा घंटे तक चले इस संवाद सत्र में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, पितृसत्तात्मक सोच, शिक्षा व रोजगार में लैंगिक समानता और महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। प्रमुख बिंदु एवं विचार :
1. स्वतंत्र पहचान और रूढ़िवादिता का विरोध
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं का उनके पिता, पति और बेटे से रिश्ता जरूर होता है, लेकिन उनकी पहचान इन रिश्तों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी की संपत्ति मानने वाली पुरानी मानसिकता को पीछे छोड़ना होगा और समाज को महिलाओं की स्वतंत्र पहचान स्वीकार करनी चाहिए।
2. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन स्वरूप
उन्होंने समाज में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और हिंसा को तीन श्रेणियों में रेखांकित किया:
प्रथम : जन्म के समय होने वाला भेदभाव व कन्या भ्रूण हत्या।
द्वितीय : शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना।
तृतीय : आर्थिक बंदिशें और वित्तीय स्वतंत्रता का अभाव।
3. नियंत्रण के सामाजिक तंत्र और आंकड़े
राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान कहा कि समाज में महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए हिंसा, अनादर, समय की पाबंदी और अत्यधिक नियंत्रण जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज भी देश में केवल लगभग 8% महिलाओं के पास स्वतंत्र संपत्ति का मालिकाना हक है और करीब 45% लड़कियों की पढ़ाई शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के चलते छूट जाती है।
4. ‘बी लाउड, बी प्राउड’ का संदेश
छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार के भय या दबाव में न रहें। उन्होंने कहा, “अपनी बात को मजबूती से रखें, गर्व महसूस करें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।” उन्होंने लड़कियों से समाज द्वारा तय किए गए बंधनों और ‘पिंजरों’ को तोड़कर शिक्षा, नौकरी और जीवन के फैसले खुद लेने का आह्वान किया।
मंच पर छात्राओं व अतिथियों से सीधा संवाद
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्राओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं, सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वहीं लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने भी मंच पर अपनी बात रखते हुए लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के महत्व पर अपने विचार रखे। राहुल गांधी ने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहित के मुद्दों पर लगातार मुखर रहने की अपील की।



