हिंदी भवन में आयोजित संगोष्ठी में पुस्तक का भव्य विमोचन, भारतीय न्याय परंपरा और नए कानूनों पर हुआ विमर्श
नई दिल्ली। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक प्रभात झा की दूसरी पुण्यतिथि पर नई दिल्ली स्थित हिंदी भवन में आयोजित संगोष्ठी केवल उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करने का अवसर नहीं बनी, बल्कि भारतीय विचार, पत्रकारिता, संगठन और न्याय-दर्शन से जुड़े विमर्श का महत्वपूर्ण मंच भी बनी। इसी गरिमामय अवसर पर दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं लेखक सुमित कुमार मिश्र की पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ का भव्य विमोचन हुआ।
कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, पद्मश्री एवं पद्म भूषण से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक हितेश शंकर, ‘कमल संदेश’ के संपादक शिवशक्ति नाथ बख्शी तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार एवं ‘दीप कमल’ के संपादक पंकज कुमार झा सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
प्रभात झा : विचार, पत्रकारिता और संगठन का समन्वय
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि प्रभात झा ने अपने विचार,
लेखनी, संगठन क्षमता और राष्ट्रसमर्पित जीवन से भाजपा को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि प्रभातजी सजग पत्रकार, संवेदनशील लेखक, कुशल संगठनकर्ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले कर्मयोगी थे। उनके शब्दों में विचार की दृढ़ता और व्यक्तित्व में आत्मीयता का अद्भुत समन्वय था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने प्रभात झा को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि उन्होंने सत्य के धर्म को अपनाते हुए राजनीतिक संगठन के दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। भाषा पर उनकी गहरी पकड़ थी और उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया। राय ने कहा कि प्रभात झा की स्मृति में आयोजनों की निरंतरता बनी रहनी चाहिए और उनके विचार एवं लेखनी नई पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी पुण्यतिथि से प्रभातजी को प्रिय विषयों पर स्मारक व्याख्यानों की श्रृंखला प्रारंभ की जाए।
‘पाञ्चजन्य’ के संपादक हितेश शंकर ने प्रभात झा की विचार स्पष्टता और राजनीतिक जीवन में विचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सत्ता और शक्ति मिलने के बाद व्यक्ति में कठोरता आना सामान्य माना जाता है, लेकिन प्रभात झा के व्यक्तित्व में शक्ति के साथ मृदुलता भी बनी रही। यही उनकी विशिष्टता थी। उन्होंने कहा कि प्रभातजी ने लोगों में भरोसा पैदा किया और लोगों के भरोसे को अपनी शक्ति बनाया।
‘कमल संदेश’ के संपादक शिवशक्ति नाथ बख्शी ने प्रभात झा को नेपथ्य में रहकर संगठन को मजबूत करने वाले नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और दिल्ली में संगठनकर्ता के रूप में प्रभातजी का योगदान उल्लेखनीय रहा। वहीं पंकज कुमार झा ने कहा कि कार्यकर्ताओं को जोड़ना और उन्हें साथ लेकर चलना प्रभात झा की बड़ी विशेषता थी। मध्यप्रदेश भाजपा के संवाद प्रमुख के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ का गरिमामय विमोचन
इसी अवसर पर ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ पुस्तक का विमोचन समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रहा। पुस्तक का विमोचन डॉ. राजभूषण चौधरी, रामबहादुर राय, हितेश शंकर, शिवशक्ति नाथ बख्शी और पंकज कुमार झा ने संयुक्त रूप से किया।
सुमित कुमार मिश्र द्वारा लिखित यह पुस्तक भारत की न्याय व्यवस्था में हुए व्यापक बदलावों को भारतीय दृष्टि और समकालीन विधिक संदर्भों के साथ समझने का प्रयास करती है। पुस्तक का प्रमुख आधार देश में 1 जुलाई 2024 से लागू तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) हैं। इन कानूनों ने क्रमशः भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लिया है।
पुस्तक में इन नए कानूनों की पृष्ठभूमि, उनके उद्देश्य, प्रमुख प्रावधानों और भारतीय न्याय व्यवस्था के व्यापक संदर्भ को सरल एवं व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। साथ ही भारतीय न्याय परंपरा से आधुनिक विधिक व्यवस्था तक की यात्रा और भविष्य के भारत में न्याय व्यवस्था की भूमिका पर भी विमर्श किया गया है।
रामबहादुर राय की प्रस्तावना ने बढ़ाया पुस्तक का महत्व
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ की प्रस्तावना पद्म भूषण रामबहादुर राय ने लिखी है। पुस्तक में भारतीय न्याय परंपरा, न्याय की अवधारणा, दंड व्यवस्था, विधिक सुधार और वर्तमान न्याय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को एक व्यापक वैचारिक परिप्रेक्ष्य में रखने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक के लिए केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी, संसद की कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल, जनता दल (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा तथा झंझारपुर के सांसद रामप्रीत मंडल ने शुभकामना संदेश एवं बधाई पत्र भी प्रदान किए हैं।
नए कानूनों को समझने की उपयोगी कड़ी
विमोचन समारोह में डॉ. राजभूषण चौधरी ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में हुए परिवर्तन को समझने के लिए ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है, जो कानूनी प्रावधानों को सरल भाषा में समाज तक पहुंचा सकें। उन्होंने ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ को विधि के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए उपयोगी बताया।
रामबहादुर राय ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें भारतीय न्याय व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान व्यवस्था तक की यात्रा को समझने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार पुस्तक केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय न्याय-दर्शन की वैचारिक पृष्ठभूमि को भी सामने लाती है।
हितेश शंकर ने इसे भारतीय न्याय व्यवस्था में आए ऐतिहासिक बदलावों को समझने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। शिवशक्ति नाथ बख्शी ने कहा कि सरल और सहज भाषा में नए आपराधिक कानूनों की व्याख्या करने के कारण यह पुस्तक आम पाठक तक भी पहुंच बनाने में सक्षम है। पंकज कुमार झा ने इसे न्याय व्यवस्था के बदलते स्वरूप को समझने के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रंथ बताया।
संघ के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची पुस्तक
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ की चर्चा हिंदी भवन से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंची। पुस्तक के लेखक सुमित कुमार मिश्र ने झंडेवालान स्थित संघ के केंद्रीय कार्यालय में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सह सरकार्यवाह अरुण कुमार से मुलाकात कर उन्हें पुस्तक भेंट की।
इस मुलाकात के दौरान भारतीय न्याय परंपरा, न्याय की मूल अवधारणा, दंड व्यवस्था, नए आपराधिक कानूनों और विकसित भारत के लक्ष्य में न्याय व्यवस्था की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर आरोग्य भारती के केंद्रीय कार्यालय मंत्री मिहिर कुमार झा भी मौजूद रहे।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि दत्तात्रेय होसबाले ने पुस्तक की विषय-वस्तु की तुलना न्यायमूर्ति एम. राम जोइस की महत्वपूर्ण कृतियों Legal and Constitutional History of India तथा Seeds of Modern Public Law in Ancient Indian Jurisprudence से की। उन्होंने भारतीय न्याय एवं संवैधानिक परंपरा को समझने के लिए गंभीर अध्ययन की आवश्यकता पर बल देते हुए सुमित मिश्र के प्रयास की सराहना की।
यह संदर्भ पुस्तक के वैचारिक महत्व को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है।
भारतीय दृष्टि के बिना न्याय की संपूर्ण समझ अधूरी
सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने न्याय की भारतीय अवधारणा को व्यापक सामाजिक और नैतिक संदर्भ में देखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में न्याय केवल कानून, अदालत और दंड की व्यवस्था नहीं रहा है, बल्कि उसका संबंध कर्तव्य, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोककल्याण से भी रहा है।
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ इसी व्यापक दृष्टि से समकालीन विधिक व्यवस्था को देखने का प्रयास करता है। पुस्तक औपनिवेशिक काल की कानूनी विरासत से आगे बढ़ते हुए भारतीय संदर्भ में न्याय की अवधारणा और आधुनिक कानूनों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास करती है।
विकसित भारत 2047 और न्याय व्यवस्था
पुस्तक का एक महत्वपूर्ण आयाम विकसित भारत 2047 के संदर्भ में न्याय व्यवस्था की भूमिका है। लेखक सुमित कुमार मिश्र का मानना है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक और भौतिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए ऐसी न्याय व्यवस्था भी आवश्यक है, जो नागरिकों को समयबद्ध, सुलभ, प्रभावी और भरोसेमंद न्याय उपलब्ध करा सके।
इसी दृष्टि से पुस्तक नए आपराधिक कानूनों को केवल कानूनी बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय शासन व्यवस्था और न्याय-दृष्टि में व्यापक परिवर्तन के हिस्से के रूप में देखने का प्रयास करती है।
पत्रकारिता से कानून और राष्ट्र विमर्श तक सुमित मिश्र की यात्रा
पुस्तक के लेखक सुमित कुमार मिश्र दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता हैं। वे पूर्व में दूरदर्शन, नई दिल्ली में कार्य कर चुके हैं और डीडी किसान चैनल के शुभारंभ से जुड़े कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। उनका पैतृक संबंध बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड स्थित कटैया गांव से है।
‘नवभारत का न्याय दर्शन’ के प्रकाशन और हिंदी भवन में इसके विमोचन से उनके पैतृक गांव कटैया सहित मधुबनी जिले में भी उत्साह का वातावरण बना। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए सुमित मिश्र को शुभकामनाएं दीं।
प्रभात झा की स्मृति और नई वैचारिक यात्रा का संगम
हिंदी भवन में आयोजित यह कार्यक्रम इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि एक ओर मंच प्रभात झा जैसे पत्रकार, लेखक और संगठनकर्ता के विचारों एवं कृतित्व को स्मरण कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसी मंच से भारतीय न्याय परंपरा और आधुनिक विधिक सुधारों पर केंद्रित एक नई पुस्तक पाठकों के बीच पहुंची।
प्रभात झा स्वयं पत्रकारिता, लेखन, संगठन और वैचारिक विमर्श के बीच सेतु का कार्य करने वाले व्यक्तित्व थे। ऐसे अवसर पर ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ का विमोचन विचार और कर्म की उस परंपरा से जुड़ता दिखाई दिया, जिसमें समाज और राष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर गंभीर अध्ययन, लेखन और संवाद को महत्व दिया जाता है।
कार्यक्रम का संचालन संजीव सिन्हा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन शरत झा ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, मनोज मिश्र, विधायक अभय वर्मा, भाजपा पूर्वांचल मोर्चा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष संतोष ओझा, विद्यानंद ठाकुर, तुष्मुल झा, अंजनी झा सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
समारोह में लगभग 850 लोगों की सहभागिता ने यह संकेत दिया कि प्रभात झा के व्यक्तित्व और विचारों के साथ-साथ भारतीय न्याय व्यवस्था में हो रहे बदलावों को लेकर भी समाज में व्यापक जिज्ञासा और विमर्श की आवश्यकता है। इस अर्थ में हिंदी भवन का यह आयोजन स्मृति, विचार और समकालीन भारत की नई वैचारिक यात्रा—तीनों का संगम बनकर सामने आया।







