संपादकीय लेखः प्रतुल पराशर
मध्य प्रदेश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राज्य में एक युवा, ऊर्जावान और अपेक्षाकृत नए नेता जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। यह फैसला न केवल पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, बल्कि कांग्रेस की उस रणनीति का भी हिस्सा है, जिसमें वह संगठनात्मक मजबूती और जनाधार को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
चुनौतीपूर्ण पृष्ठभूमि में नई शुरुआत
2018 में सत्ता में लौटने के बाद कांग्रेस को 2020 में बहुमत खोकर सत्ता से बाहर होना पड़ा। तब से पार्टी लगातार संघर्षरत रही है — संगठनात्मक बिखराव, नेताओं का पलायन और जनसमर्थन में गिरावट। ऐसे माहौल में जीतू पटवारी का चयन एक साहसी लेकिन दूरदर्शी निर्णय कहा जा सकता है। वे न केवल युवा हैं, बल्कि तेजतर्रार वक्ता, जमीन से जुड़े और ऊर्जा से भरपूर नेता हैं।
युवाओं और किसानों पर फोकस
मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और बेरोजगारी युवाओं की सबसे बड़ी चिंता है। पटवारी इन दोनों वर्गों के मुद्दों को लंबे समय से उठा रहे हैं। यदि वे संगठन को इन दो वर्गों के इर्द-गिर्द खड़ा करने में सफल होते हैं, तो कांग्रेस की जड़ें फिर से मज़बूत हो सकती हैं।
भाजपा को जवाब देने की रणनीति
वर्तमान शिवराज-मोदी युग में भाजपा का सांगठनिक ढांचा बेहद मज़बूत है। ऐसे में जीतू पटवारी को भाजपा की नीतियों और घोषणाओं का विश्लेषणात्मक और सटीक जवाब देना होगा — सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि वैकल्पिक सोच और समाधान प्रस्तुत करके। इसके लिए उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन और सामंजस्य भी चाहिए होगा।
गुटबाज़ी पर नियंत्रण और समन्वय
मध्य प्रदेश कांग्रेस का सबसे बड़ा रोग है — गुटबाज़ी। दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, अरुण यादव, अजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के साथ तालमेल बनाए रखना पटवारी के लिए बड़ी चुनौती होगी। लेकिन अगर वे इन नेताओं के अनुभव और अपनी ऊर्जा को एक साथ साधने में सफल होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा परिवर्तनकारी क्षण हो सकता है।
आने वाले वर्षों की तैयारी अभी से
2028 की विधानसभा और 2029 की लोकसभा चुनाव दूर ज़रूर हैं, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से अभी से ही संगठन को चुनावी मोड में लाना पटवारी की प्राथमिकता होनी चाहिए। बूथ लेवल तक कार्यकर्ता नियुक्ति, डेटा आधारित रणनीति, युवाओं को जोड़ना, और मीडिया एवं सोशल मीडिया पर प्रभावी मौजूदगी — ये सब मिलकर कांग्रेस को दोबारा मज़बूत कर सकते हैं।
कुल मिलाकर जीतू पटवारी जी के पास अवसर भी है और चुनौती भी। उन्हें संगठन को एक नई दिशा में ले जाने के लिए साहसिक फैसले लेने होंगे। यदि वे अनुभव और ऊर्जा का संतुलन साध पाते हैं, तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वापसी की संभावनाएं वास्तविक हो सकती हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस के पुनरुत्थान की कहानी लिखी जा सकती है — बशर्ते संगठन, वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें।



